गुरुवर तुमने कृपा करके जब से दिया सहारा,झंकृत हो गई मन की वीणा रोम रोम ये पुकारा -गीता आधार हैं मेरा ,कृष्ण ही प्यार हैं मेरा
१. गीता कृष्ण में ,कृष्ण गीता में सचमुच अनुभव होते,
एक ही धुन में रहने लगा मन अब तो जगते सोते-
एक ही धुन में रहने लगा मन अब तो जगते सोते-
२.चिंता तज ले शरण मेरी, जब पाठ में भाव ये आता,
भगवत वाणी ऐसी पढ़ मन झूम झूम ये गाता -
भगवत वाणी ऐसी पढ़ मन झूम झूम ये गाता -
३. गुरुवार की ऐसी कृपा को कहो मैँ कैसे भुलाऊ,
ढोल बजा और हाथ उठा सारे जग को यही सुनाऊँ-
ढोल बजा और हाथ उठा सारे जग को यही सुनाऊँ-
४. बनी रहे ये कृपा गुरुवार बढ़ता रहे कृष्ण प्यार ,
गीता वाणी सुनु सुनाऊँ किंकर ये ही पुकार -
गीता वाणी सुनु सुनाऊँ किंकर ये ही पुकार -

