Tuesday, 2 August 2016

गुरुवर तुमने कृपा करके जब से दिया सहारा



गुरुवर तुमने कृपा करके जब से दिया सहारा,झंकृत हो गई मन की वीणा रोम रोम ये पुकारा -गीता आधार हैं मेरा ,कृष्ण ही प्यार हैं मेरा

. गीता कृष्ण में ,कृष्ण गीता में सचमुच अनुभव होते,
    एक ही धुन में रहने लगा मन अब तो जगते सोते-

.चिंता तज ले शरण मेरी, जब पाठ में भाव ये आता,
   भगवत वाणी ऐसी पढ़ मन झूम झूम ये गाता -

. गुरुवार की ऐसी कृपा को कहो मैँ कैसे भुलाऊ,
    ढोल बजा और हाथ उठा सारे जग को यही सुनाऊँ-


. बनी रहे ये कृपा गुरुवार बढ़ता रहे कृष्ण प्यार ,
     गीता वाणी सुनु सुनाऊँ किंकर ये ही पुकार -

मन छोड़ दे जग की चिंता बस प्रभु का नाम लिये जा

मन छोड़ दे जग की चिंता बस प्रभु का नाम लिये जा ,वो अपना काम करेंगे तू अपना काम किये जा ..

. प्रभु से ही प्रभु को मांग कर अर्जुन ने चिंता छोड़ी सारथि बनाया उनको सौंपी प्रभु हाथ में डोरी,चिंता तज हरि भज तू भी उसकी ही मौज में जिये जा, वो अपना काम...

. गीता का प्रेम निराला ,हँस कर पिया जहर का प्याला, करने विष को भी अमृत गये गिरधारी,चिंता विष छोड़ दे पगले ,अमृत चिंतन का पिये जा ,वो अपना..

. क्या मिलना और क्या होना,क्या पाना और क्या खोना,सब हाथ में प्रभु के ही हैं किस बात का हैं रोना,सब भार उतार तू किंकर उसका उसको ही दिये जा वो अपना काम करेंगे...