मन
छोड़ दे
जग की
चिंता बस
प्रभु का
नाम लिये
जा ,वो अपना
काम करेंगे
तू अपना
काम किये
जा ..
१. प्रभु
से ही
प्रभु को
मांग कर
अर्जुन ने
चिंता छोड़ी
सारथि बनाया
उनको सौंपी
प्रभु हाथ
में डोरी,चिंता
तज हरि
भज तू
भी उसकी
ही मौज
में जिये
जा, वो अपना
काम...
२. गीता
का प्रेम
निराला ,हँस कर
पिया जहर
का प्याला, करने
विष को
भी अमृत
आ गये
गिरधारी,चिंता विष
छोड़ दे
पगले ,अमृत चिंतन
का पिये
जा ,वो अपना..
३. क्या
मिलना और
क्या होना,क्या
पाना और
क्या खोना,सब
हाथ में
प्रभु के
ही हैं
किस बात
का हैं
रोना,सब भार
उतार तू
किंकर उसका
उसको ही
दिये जा
वो अपना
काम करेंगे...

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